CBI ने साउथ ईस्ट एशिया में चल रहे साइबर फ्रॉड गिरोहों से जुड़े मानव तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो प्रमुख आरोपियों निपेंद्र चौधरी और निलेश नरपत सिंह पुरोहित को गिरफ्तार किया है। CBI जांच के मुताबिक, ये नेटवर्क भारतीय नागरिकों को विदेश में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजता था। इसके बाद पीड़ितों को मुख्य रूप से म्यांमार और कंबोडिया में संचालित तथाकथित "स्कैम कंपाउंड्स" में पहुंचाया जाता था, जहां उन्हें "साइबर गुलामी" जैसी परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर किया जाता था।
कैसे चल रहा था अपराध का खेल?
जांच में सामने आया है कि ये स्कैम कंपाउंड्स अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध सिंडिकेट्स द्वारा संचालित किए जाते हैं और दुनिया भर में बड़े पैमाने पर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देने के केंद्र हैं। यहां ले जाए गए भारतीय नागरिकों को कथित तौर पर अवैध साइबर अपराध गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता था। उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे, आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया जाता था और कई पीड़ितों को शारीरिक तथा मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था।
भारतीयों को म्यांमार कैसे पहुंचाया जाता था?
CBI के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी निपेंद्र चौधरी म्यांमार स्थित स्कैम कंपाउंड ऑपरेटरों के लिए काम करता था और भारत से भेजे गए लोगों को थाईलैंड के रास्ते म्यांमार पहुंचाने की व्यवस्था करता था। पीड़ितों को बैंकॉक से माए सॉट ले जाया जाता था और फिर अवैध रूप से थाईलैंड-म्यांमार सीमा पार कराकर स्कैम कंपाउंड्स तक पहुंचाया जाता था। वहीं, निलेश नरपतसिंह पुरोहित पूरे भारत में फैले सब-एजेंट नेटवर्क का संचालन करता था।
क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होता था भुगतान
जांच में पता चला है कि ये थाईलैंड-म्यांमार सीमा के पास स्थित एक स्कैम कंपाउंड से काम कर रहा था और अवैध गतिविधियों के संचालकों से क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान प्राप्त करता था। इससे पहले मई 2026 में CBI ने इसी मामले में चार राज्यों के आठ ठिकानों पर छापेमारी कर एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया था।
CBI ने लोगों से की ये अपील
CBI ने लोगों से सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स या अनौपचारिक माध्यमों से मिलने वाले विदेशी नौकरी के प्रस्तावों को लेकर सतर्क रहने की अपील की है। एजेंसी ने कहा है कि नौकरी के किसी भी प्रस्ताव की आधिकारिक माध्यमों से जांच-पड़ताल जरूर करें, क्योंकि ऐसे फर्जी ऑफर आर्थिक नुकसान, शोषण और गंभीर कानूनी, शारीरिक एवं मानसिक परिणामों का कारण बन सकते हैं।
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